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रेलवे कर्मचारियों, पेंशनरों और परिवार के लिए कैंसर का इलाज: टाटा मेमोरियल सेंटर से करार, रेफरल के नियम और कैशलेस सुविधा (30.04.2026)

रेलवे कर्मचारियों, पेंशनरों और परिवार के लिए कैंसर का इलाज: टाटा मेमोरियल सेंटर से करार, रेफरल के नियम और कैशलेस सुविधा (30.04.2026)

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Date of Posting
3 November 2026

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में सबसे बड़ी चिंता इलाज के सही अस्पताल और रेफरल की होती है। रेलवे बोर्ड के 30 अप्रैल 2026 के पत्र के अनुसार, रेलवे कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके पात्र आश्रितों के लिए देश के आठ टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) में कैंसर इलाज की विशेष व्यवस्था की गई है। इलाज का भुगतान और खर्च की सीमा संबंधित MoU तथा रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार होगी। पत्र में इसे कैशलेस कैंसर इलाज कहा गया है, पर नीचे की तालिका में दिखाया है कि अलग-अलग जगह खर्च और वापसी की शर्तें अलग हैं। साथ ही पत्र में कैंसर के इलाज की रेलवे की स्वास्थ्य नीति की मुख्य बातें और रेफरल बनाने का तरीका भी दिया गया है। इस लेख में हम यह सब आसान भाषा में समझाएँगे।

मुख्य बातें

  • रेलवे ने आठ टाटा मेमोरियल सेंटर के साथ खास और व्यापक करार किया है। पत्र के अनुसार कोई भी रेलवे कर्मचारी, पेंशनर और आश्रित परिवार के सदस्य इन सभी आठ सेंटर में कैंसर इलाज का लाभ ले सकते हैं। भुगतान और खर्च की सीमा MoU और बोर्ड के निर्देशों के अनुसार है, इसलिए हर खर्च, प्रक्रिया या दवा बिना शर्त अपने आप कैशलेस हो, ऐसा न समझें।

  • पत्र के अनुसार रेफरल पत्र जारी होने की तारीख से 90 दिन के भीतर इलाज शुरू हो सकता है। एक रेफरल के भीतर 6 परामर्श की अनुमति है, और आगे के इलाज के लिए रिवैलिडेशन या एक्सटेंशन की व्यवस्था बताई गई है।

  • पत्र में कैंसर रेफरल को “Once in a Lifetime” बताया गया है और रेफरल नंबर वही रखने की बात कही गई है। चल रहे इलाज के फॉलो-अप के लिए दोबारा रेफरल की जरूरत नहीं।

  • टाटा मेमोरियल सेंटर में शुरुआती जाँच और परामर्श के लिए रेफरल, अनुमति या एंडोर्समेंट की जरूरत नहीं। सरकारी अस्पताल, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान और रेलवे/CGHS के पैनलबद्ध अस्पतालों में भी इलाज के विकल्प हैं।

  • जोनल और मंडल रेलवे अस्पतालों में कैंसर के सभी मामलों के लिए एक नोडल रेलवे डॉक्टर (SG से कम नहीं) नामित होगा।

पत्र एक नजर में

पत्र संख्या

2026/H-1/11/1/TMH Recog.

तारीख

30 अप्रैल 2026, नई दिल्ली

किसे भेजा

सभी भारतीय रेलों के महाप्रबंधक, PCMD और PHOD; DG, RDSO; DG, CTIs

विषय

देशभर के टाटा मेमोरियल सेंटर के साथ कैंसर इलाज की सुविधा और कैंसर इलाज पर रेलवे की स्वास्थ्य नीति की मुख्य बातें

जिन पुराने पत्रों का हवाला

कैंसर इलाज पर स्वास्थ्य नीति का पत्र दिनांक 05.05.2025 (संख्या 2025/I & Trans Cell/Healthcare/2/P), और 29.08.2024 के स्वास्थ्य नीति निर्देश

हस्ताक्षर

प्रणव कुमार मल्लिक (ED/ट्रांसफॉर्मेशन) और डॉ. आशुतोष गर्ग (निदेशक/स्वास्थ्य नीति और परियोजनाएँ), रेलवे बोर्ड; DG (RHS) की मंजूरी से

आठ टाटा मेमोरियल सेंटर कौन-से हैं

सेंटर

जगह

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (TMH)

मुंबई

ACTREC (एडवांस्ड सेंटर फॉर ट्रीटमेंट रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर)

नवी मुंबई

TMC (होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर)

मुज़फ्फरपुर, बिहार

TMC (होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर)

विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश

TMC (होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर)

मुल्लांपुर, न्यू चंडीगढ़

TMC (होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल)

संगरूर, पंजाब

TMC (महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर)

BHU कैंपस, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

TMC (डॉ. भुवनेश्वर बरुआ कैंसर इंस्टीट्यूट)

गुवाहाटी, असम

पत्र के अनुसार रेलवे के इन करारों के दस्तावेज़ रेलवे बोर्ड की वेबसाइट पर स्वास्थ्य निदेशालय के पेज (“MoUs with Units of TMC for Cancer Treatment”) पर उपलब्ध हैं।

कैंसर रेफरल कैसे बनता है (HMIS पर)

पत्र के अनुसार यह सुनिश्चित करने के लिए कि 100 प्रतिशत कैंसर रेफरल नीति के मुताबिक बनें, HMIS पर रेफरल बनाने का यह तरीका दिया गया है:

  1. HMIS खोलें और OPD डॉक्टर के डेस्क पर जाएँ।

  2. “Referral / Cross Consultation” चुनें।

  3. “Refer Type” में “Private Empanelled HCO” चुनें।

  4. “Department” में “Oncology / Cancer” चुनें।

पत्र में यह भी लिखा है कि रेलवे डॉक्टर के रेफरल पत्र की क्लिनिकल रिमार्क्स में कोई अनावश्यक या गैर-चिकित्सीय टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। सिर्फ मरीज की चिकित्सीय स्थिति और इलाज के लिए जरूरी बातें लिखी जाएँ।

रेफरल के नियम (अनुलग्नक-I की मुख्य बातें)

  • रेफरल पत्र जारी होने की तारीख से 90 दिन के भीतर इलाज शुरू हो सकता है। यह 90 दिन की अवधि रेफरल जारी होने की तारीख से गिनी जाएगी।

  • रेफरल जारी होने के बाद उसके भीतर 6 परामर्श की अनुमति है, अगर प्राथमिक विशेषज्ञ ने सलाह दी हो। आगे के इलाज के लिए आवश्यक होने पर रेफरल की रिवैलिडेशन या एक्सटेंशन की व्यवस्था भी बताई गई है।

  • अगर पहले कैंसर का रेफरल दिया जा चुका है, तो चल रहे इलाज के फॉलो-अप के लिए दोबारा रेफरल की जरूरत नहीं।

  • पत्र में कैंसर रेफरल को “Once in a Lifetime” बताया गया है और रेफरल नंबर वही रखने की बात कही गई है।

  • एकल खिड़की: AGM (जोनल रेलवे अस्पताल के लिए) और DRM (मंडल रेलवे अस्पताल के लिए) को कैंसर के सभी मामलों के लिए एक रेलवे डॉक्टर (SG से कम नहीं) को नोडल अधिकारी बनाना है।

सबसे काम की बात: टाटा मेमोरियल सेंटर में पहली बार जाना

  • शुरुआती जाँच, परामर्श और जाँच (TMC/TMH/ACTREC में): पत्र के अनुसार इसके लिए रेफरल, अनुमति या एंडोर्समेंट की जरूरत नहीं है। इसका खर्च IR के MoU की दर पर या असल खर्च पर, जो कम हो, वापस होने की बात है।

  • आगे का इलाज: इसके लिए रेलवे डॉक्टर का रेफरल चाहिए, जैसा पत्र में बताया गया है (नीचे की तालिका और मुंबई वाला हिस्सा देखें)।

कहाँ इलाज, और रेफरल व खर्च के नियम

कहाँ

शुरुआती जाँच/OPD

आगे का इलाज/IPD

खर्च और दवाएँ

टाटा मेमोरियल सेंटर (TMH मुंबई, ACTREC और बाकी TMC)

शुरुआती जाँच, परामर्श और जाँच के लिए रेफरल, अनुमति या एंडोर्समेंट जरूरी नहीं (TMH की प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी शाखा या OPD में)

रेलवे डॉक्टर का रेफरल, जिसमें अस्पताल में परामर्श, जाँच, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, सर्जरी सब शामिल हैं। IPD में रोबोटिक/लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, इम्प्लांट आदि CGHS में जितने मान्य हैं, उतने शामिल

OPD का खर्च IR के MoU की दर पर या असल खर्च पर, जो कम हो; रजिस्ट्रेशन, परामर्श, शुरुआती जाँच और OPD की दवा भी शामिल हो सकती है। ऑपरेशन के बाद की और फॉलो-अप की दवाएँ TMC देगा; न दे सके तो उसका प्रमाणपत्र देगा और कोई भी रेलवे अस्पताल/स्वास्थ्य इकाई दवा देगी

सरकारी अस्पताल और राष्ट्रीय महत्व के संस्थान (INI)

पत्र के अनुसार कैंसर इलाज (OPD/IPD/जाँच) के लिए रेफरल, अनुमति या एंडोर्समेंट जरूरी नहीं

जिन मामलों में रेफरल इलाज/IPD चाहिए, रेफरल मरीज के UMID के अनुसार क्षेत्राधिकार वाले रेलवे अस्पताल से मिलेगा

असल खर्च या शहर के हिसाब से CGHS दर, जो कम हो; रजिस्ट्रेशन, परामर्श, शुरुआती इलाज और OPD की दवा शामिल हो सकती है। ऑपरेशन के बाद और फॉलो-अप की दवाएँ संस्थान/अस्पताल देगा; न दे सके तो प्रमाणपत्र देगा और UMID की पैन-IR वैधता के कारण कोई भी रेलवे अस्पताल दवा देगा

रेलवे या CGHS के पैनलबद्ध अस्पताल

कैंसर की OPD/परामर्श/जाँच के लिए रेफरल जरूरी नहीं (IPD को छोड़कर)

रेफरल इलाज/IPD के मामलों में क्षेत्राधिकार वाले रेलवे अस्पताल से, UMID के अनुसार। रेफरल में इलाज शामिल है; IPD का इलाज संबंधित अस्पताल के साथ MoU के अनुसार, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, दवाएँ और जाँचें भी इलाज के खर्च में शामिल

खर्च की वापसी तभी, जब कैंसर/मैलिग्नेंसी की पुष्टि हो गई हो, और असल खर्च या शहर के हिसाब से CGHS दर, जो कम हो। जो दवाएँ पैनलबद्ध अस्पताल न दे सके और ऑपरेशन के बाद की दवाएँ कोई भी रेलवे अस्पताल मरीज के कहने पर देगा

INI से पत्र का मतलब है: 25 AIIMS, PGI चंडीगढ़, PGI पुडुचेरी और NIMHANS बेंगलुरु। “सभी CGHS पैनलबद्ध अस्पताल” और “रेलवे के कोई भी पैनलबद्ध अस्पताल” भी पत्र में कैंसर इलाज के दायरे में गिने गए हैं।

मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के लिए खास बात

जिन मरीजों को OPD, परामर्श या जाँच के आधार पर TMC/TMH (ACTREC सहित) में रेफर करना जरूरी है, उनके पास पत्र के अनुसार दो रास्ते हैं: अपने क्षेत्राधिकार वाले रेलवे अस्पताल से रेफरल लें (जो UMID में दर्ज है), या मुंबई में ही रेलवे के दो नोडल जोनल रेलवे अस्पतालों, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मेमोरियल रेलवे हॉस्पिटल या बाबू जगजीवन राम रेलवे हॉस्पिटल, से रेफरल लें।

पत्र में क्या साफ नहीं है

  • राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के लिए पत्र पहले कहता है कि OPD/IPD समेत इलाज के लिए रेफरल, अनुमति या एंडोर्समेंट जरूरी नहीं, पर अगली पंक्ति में लिखा है कि जिन मामलों में रेफरल इलाज/IPD चाहिए, वहाँ रेफरल क्षेत्राधिकार वाले रेलवे अस्पताल से मिलेगा। इन दोनों को साथ कैसे पढ़ना है, यह पत्र में नहीं समझाया गया। अपने रेलवे अस्पताल से लिखित में पूछ लें।

  • MoU की दरें और “कैशलेस” की सीमाएँ पत्र में नहीं हैं। वे बोर्ड की वेबसाइट पर रखे MoU में होंगी।

  • अलग बीमारी, दोबारा कैंसर होने या नए मामले में रेफरल की प्रक्रिया क्या होगी, इस पर पत्र में विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। रिवैलिडेशन या एक्सटेंशन कब और कैसे मिलेगा, यह भी विस्तार से नहीं बताया गया।

  • पत्र “कोई भी रेलवे कर्मचारी, पेंशनर और आश्रित परिवार के सदस्य” कहता है। RELHS के किस विकल्प (FMA के साथ या बिना) वाले पेंशनर को यह सुविधा कैसे मिलेगी, यह पत्र में अलग से नहीं लिखा है।

  • पत्र 05.05.2025 की नीति और 29.08.2024 के निर्देशों का हवाला देता है। वे हमारे पास नहीं हैं, इसलिए उनकी बातें इस लेख में नहीं हैं।

इलाज के लिए जाने से पहले ये कागज साथ रखें (हमारा व्यावहारिक सुझाव, पत्र की तय सूची नहीं)

  • UMID कार्ड।

  • रेलवे अस्पताल का रेफरल, जहाँ जरूरी हो।

  • पहले की बायोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट।

  • CT, MRI, PET-CT और दूसरी जाँचों की रिपोर्ट।

  • पहले के इलाज के रिकॉर्ड और पर्चियाँ।

  • जहाँ खर्च की वापसी की बात हो, वहाँ बिल और रसीदें।

यह सूची हमारी तरफ से है, 30.04.2026 के पत्र में इन कागजों को जरूरी नहीं बताया गया है।

मरीज और परिवार के लिए सुझाव (हमारा सुझाव, नियम नहीं)

  • सबसे पहले अपने क्षेत्राधिकार वाले रेलवे अस्पताल में जाकर पूछें कि कैंसर के मामलों के लिए नोडल डॉक्टर कौन हैं।

  • अपना UMID और रेफरल पत्र (भौतिक या डिजिटल) हमेशा साथ रखें, और रेफरल नंबर संभालकर रखें, क्योंकि यह जीवन में एक बार का रेफरल है।

  • रेफरल मिलने के 90 दिन के भीतर इलाज शुरू करने की कोशिश करें।

  • असल बिल, जाँच रिपोर्ट और दवाओं की पर्चियाँ सँभालकर रखें, ताकि खर्च की वापसी के समय दिक्कत न हो।

  • किसी भी शंका पर लिखित में पूछें। पत्र के अनुसार स्वास्थ्य नीति और HMIS के मामलों में रेलवे बोर्ड का स्वास्थ्य निदेशालय (निदेशक/स्वास्थ्य नीति और परियोजनाएँ) एकल संपर्क बिंदु (SPOC) है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रेलवे कर्मचारी के परिवार को भी कैंसर इलाज मिलेगा?

पत्र के अनुसार हाँ। कोई भी रेलवे कर्मचारी, पेंशनर और आश्रित परिवार के सदस्य आठों टाटा मेमोरियल सेंटर में कैंसर इलाज का लाभ ले सकते हैं। भुगतान MoU और बोर्ड के निर्देशों के अनुसार होगा।

क्या टाटा मेमोरियल सेंटर में इलाज के लिए पहले रेफरल लेना होगा?

शुरुआती जाँच, परामर्श और जाँच के लिए रेफरल, अनुमति या एंडोर्समेंट जरूरी नहीं। आगे के इलाज के लिए रेफरल क्षेत्राधिकार वाले रेलवे अस्पताल से लेना होता है, या मुंबई में दो नोडल रेलवे अस्पतालों से।

रेफरल कितने दिन के लिए वैध है?

पत्र के अनुसार रेफरल जारी होने की तारीख से 90 दिन के भीतर इलाज शुरू किया जा सकता है। एक रेफरल के भीतर 6 परामर्श की अनुमति है। आगे के इलाज के लिए आवश्यक होने पर रिवैलिडेशन या एक्सटेंशन की व्यवस्था बताई गई है।

क्या फॉलो-अप के लिए हर बार नया रेफरल चाहिए?

नहीं। अगर पहले कैंसर का रेफरल दिया जा चुका है, तो चल रहे इलाज के फॉलो-अप के लिए दोबारा रेफरल की जरूरत नहीं।

क्या सरकारी अस्पताल या AIIMS में भी इलाज हो सकता है?

पत्र में सरकारी अस्पताल और राष्ट्रीय महत्व के संस्थान (25 AIIMS, PGI चंडीगढ़, PGI पुडुचेरी, NIMHANS) कैंसर इलाज के दायरे में गिने गए हैं। खर्च असल खर्च या शहर के CGHS दर के हिसाब से, जो कम हो, वापस होगा।

क्या निजी पैनलबद्ध अस्पताल में इलाज मिलेगा?

रेलवे या CGHS के पैनलबद्ध अस्पताल में कैंसर की OPD, परामर्श और जाँच के लिए रेफरल जरूरी नहीं, पर IPD के लिए रेफरल चाहिए। खर्च की वापसी तभी है जब कैंसर की पुष्टि हो गई हो।

कैंसर की दवाएँ कहाँ से मिलेंगी?

ऑपरेशन के बाद की और फॉलो-अप की दवाएँ इलाज करने वाला अस्पताल देगा। न दे सके तो वह प्रमाणपत्र देगा और कोई भी रेलवे अस्पताल या स्वास्थ्य इकाई मरीज के कहने पर दवा उपलब्ध कराएगी।

कैंसर के लिए नोडल डॉक्टर कौन होंगे?

पत्र के अनुसार AGM (जोनल रेलवे अस्पताल के लिए) और DRM (मंडल रेलवे अस्पताल के लिए) एक रेलवे डॉक्टर (SG से कम नहीं) को सभी कैंसर मामलों के लिए नोडल नामित करेंगे।

इस लेख के स्रोत: रेलवे बोर्ड का पत्र 2026/H-1/11/1/TMH Recog., दिनांक 30.04.2026, अनुलग्नक-I सहित (विषय: Cancer treatment facility with Tata Memorial Center/s all over India and basic features of IR’s healthcare policy on cancer treatment)।

यह जानकारी रेलवे बोर्ड के पत्र पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। तालिकाएँ और सुझाव हमारे हैं, आदेश का हिस्सा नहीं। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और लागू नियमों पर निर्भर है। इलाज और रेफरल के लिए अपने रेलवे अस्पताल और नोडल डॉक्टर से पुष्टि जरूर करें।

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