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रिटायरमेंट के बाद रेलवे कर्मचारियों के लिए RELHS: FMA या बिना FMA, UMID, रेफरल, इमरजेंसी के नियम और VR व नवजात शिशुओं के लिए 2026 के आदेश

रिटायरमेंट के बाद रेलवे कर्मचारियों के लिए RELHS: FMA या बिना FMA, UMID, रेफरल, इमरजेंसी के नियम और VR व नवजात शिशुओं के लिए 2026 के आदेश

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Date of Posting
2 November 2026

रिटायर होने के बाद रेलवे कर्मचारी और उनके परिवार को इलाज कैसे मिलता है, यह सवाल हर रिटायर होने वाले कर्मचारी के मन में रहता है। रेलवे बोर्ड के स्वास्थ्य निदेशालय ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक विस्तृत FAQ जारी किया है, और फरवरी 2026 के दो आदेशों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VR) लेने वालों और नवजात शिशुओं के इलाज के बारे में अलग से निर्देश दिए हैं। इस लेख में हम दोनों को आसान भाषा में समझाएँगे और साथ में पुराने आदेशों की वह जानकारी भी देंगे जो परिवार के सदस्यों की पात्रता से जुड़ी है।

मुख्य बातें

  • RELHS का मतलब है रिटायर्ड एम्प्लॉयीज़ लिबरलाइज्ड हेल्थ स्कीम। यह सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों और उनके पात्र आश्रितों को चिकित्सा सुविधा देती है।

  • रिटायरमेंट से पहले दो विकल्प हैं: बिना FMA (FAQ में सुझाया गया विकल्प) और FMA के साथ (₹1,000 प्रति माह, पर रेलवे अस्पताल में सामान्य OPD नहीं)।

  • UMID कार्ड अपने आप बनता है। इलाज देश के किसी भी रेलवे अस्पताल या स्वास्थ्य इकाई में लिया जा सकता है।

  • नियोजित इलाज के लिए पहले रेलवे अस्पताल, फिर जरूरत पर रेफरल, फिर पैनलबद्ध अस्पताल। जान को खतरे वाली स्थिति में सीधे पैनलबद्ध अस्पताल जा सकते हैं।

  • 12.02.2026 के आदेश के अनुसार VR लेने वाले कर्मचारी और उनके परिवार को RELHS कार्ड बनने तक के बीच के समय में मानवीय नजरिए से इलाज देने की सलाह दी गई है।

  • 27.02.2026 के आदेश के अनुसार नवजात शिशु का UMID न बना हो तो भी इमरजेंसी में इलाज में देरी न हो, इसके लिए मानवीय नजरिया अपनाने के निर्देश हैं, और HMIS पर नवजात के लिए तुरंत UMID बनाने की व्यवस्था बताई गई है।

दो दस्तावेज़ एक नजर में

12.02.2026 का आदेश

RELHS FAQ

क्या है

रेलवे बोर्ड का पत्र, संख्या 2026/H-1/2/2/Medical Facilities, दिनांक 12.02.2026

रेलवे बोर्ड के स्वास्थ्य निदेशालय (Dir/H/P&P) का सूचना-दस्तावेज़, ई-ऑफिस फाइल 2025/H-1/2/3/RELHS-Part(I), 30.09.2026 को तैयार

किसे भेजा

सभी रेलवे के प्रिंसिपल चीफ मेडिकल डायरेक्टर, और RDSO सहित उत्पादन इकाइयों के चीफ मेडिकल ऑफिसर

सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी (जानकारी के लिए)

विषय

VR लेने पर RELHS कार्ड बनने तक के बीच में इलाज रुकना

सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों के लिए चिकित्सा सुविधाएँ, सवाल-जवाब

हस्ताक्षर

डॉ. आशुतोष गर्ग, निदेशक/स्वास्थ्य (नीति और परियोजना), रेलवे बोर्ड

स्वास्थ्य निदेशालय

RBE संख्या

नहीं छपी है

नहीं छपी है; यह आदेश नहीं, सूचना-दस्तावेज़ है

FAQ में साफ लिखा है कि ये सवाल-जवाब केवल जानकारी के लिए हैं, और किसी अंतर या विवाद की स्थिति में मौजूदा नियम और पॉलिसी गाइडलाइंस ही मान्य होंगी।

RELHS में कब और कैसे जुड़ें

  • RELHS का विकल्प रिटायरमेंट से पहले ही चुन लेना चाहिए। FAQ के अनुसार RELHS ऑप्शन फॉर्म पर्सनल ब्रांच में रिटायरमेंट से लगभग तीन महीने पहले जमा करना ठीक रहेगा।

  • जुड़ने के लिए एक बार की राशि देनी होती है: रिटायरमेंट के समय का आखिरी बेसिक पे, या 7वें वेतन आयोग के लेवल के आधार पर तय एक निश्चित राशि, इनमें जो कम हो। यह राशि रिटायरमेंट के भुगतान (DCRG आदि) से काट ली जाती है, अलग से नकद नहीं देना होता।

  • FAQ में एक बार विकल्प बदलने का मौका बताया गया है: FMA वाले विकल्प से बिना FMA वाले में या उलटा। इसके लिए संबंधित पर्सनल ब्रांच में आवेदन करना होगा।

दो विकल्प: बिना FMA और FMA के साथ

बात

RELHS बिना FMA

RELHS FMA के साथ

FMA (निश्चित चिकित्सा भत्ता)

नहीं

₹1,000 प्रति माह, पेंशन के साथ

रेलवे अस्पताल में सामान्य बीमारी की OPD

उपलब्ध

उपलब्ध नहीं

इमरजेंसी इलाज

उपलब्ध

उपलब्ध

पुरानी (क्रॉनिक) बीमारी का इलाज

उपलब्ध

उपलब्ध

रेलवे की पूरी चिकित्सा सुविधाएँ

हाँ

गाइड में बताई सीमाओं के साथ

किसके लिए ठीक

जो रेलवे स्वास्थ्य सुविधा के पास रहते हैं (FAQ में यही सुझाया गया है)

FAQ के अनुसार आम तौर पर नहीं; गाँव में बसने वाले के लिए ठीक हो सकता है जहाँ 50 किमी के भीतर रेलवे स्वास्थ्य सुविधा न हो

विकल्प बदलने का मौका

एक बार

एक बार

UMID कार्ड

  • FAQ के अनुसार UMID कार्ड अपने आप बन जाता है। प्ले स्टोर से HMIS ऐप डाउनलोड करके UMID में दर्ज मोबाइल नंबर से लॉग इन करना होता है।

  • अलग से भौतिक कार्ड जरूरी नहीं, पर UMID पोर्टल से उसका PVC प्रिंट रखा जा सकता है।

  • पात्र आश्रितों को रिटायरमेंट से पहले ही UMID में जोड़ लेना चाहिए: जैसे पति/पत्नी और मौजूदा नियमों के अनुसार बाकी आश्रित।

  • अपना UMID किसी और को न दें। UMID की जानकारी: umid.digitalir.in।

इलाज कहाँ और क्या-क्या मिलता है

  • FAQ के अनुसार इलाज देश के किसी भी रेलवे अस्पताल या स्वास्थ्य इकाई में लिया जा सकता है, सिर्फ अपने चुने हुए अस्पताल में नहीं।

  • सुविधाएँ अस्पताल में उपलब्ध साधनों पर निर्भर हैं: OPD, भर्ती (इन-पेशेंट), विशेषज्ञ, जाँचें (प्रयोगशाला जाँच, X-ray, ECG, अल्ट्रासाउंड, और जहाँ उपलब्ध हो CT/MRI), दवाखाना और रेफरल।

  • अस्पताल में भर्ती और इलाज (IPD) मुफ्त बताया गया है। अस्पताल का डाइट लेने पर तय दरों और पे लेवल के आधार पर शुल्क लग सकता है।

  • क्रॉनिक बीमारी की सभी जरूरी दवाएँ मुफ्त हैं। अगर दवा अस्पताल में न हो, तो CMS उसे मँगवाकर या स्थानीय रूप से खरीदकर कैशलेस उपलब्ध कराएगा।

  • क्रॉनिक दवाओं के लिए हर महीने अपनी सुविधा की किसी कार्य-दिवस पर अस्पताल जाएँ और पुरानी पर्ची साथ रखें। विदेश जाना हो या तीन महीने की दवा चाहिए हो, तो संबंधित चिकित्सा अधिकारी को कम से कम एक सप्ताह पहले बताएँ।

बुजुर्गों के लिए खास बातें (FAQ के अनुसार)

  • 80 साल से ऊपर के लोगों के लिए OPD और दवाखाने में अलग कतार।

  • माँगने पर व्हीलचेयर की मदद और सालाना मेडिकल जाँच।

  • कई अस्पतालों में RELHS लाभार्थियों के लिए पंजीकरण और दवा के अलग काउंटर।

  • 70 साल से ज्यादा उम्र के RELHS लाभार्थी, जो FMA नहीं ले रहे, OPD सलाह के लिए सीधे पैनलबद्ध अस्पताल भी जा सकते हैं।

नियोजित इलाज: कदम-दर-कदम

  1. पहले रेलवे अस्पताल की OPD में जाएँ।

  2. रेलवे डॉक्टर आपकी जाँच करेंगे।

  3. अगर रेफरल की जरूरत हुई, तो HMIS पर रेफरल पत्र बनेगा।

  4. UMID और रेफरल पत्र (भौतिक या डिजिटल) लेकर पैनलबद्ध अस्पताल जाएँ।

  5. इलाज कैशलेस होगा, पैनलबद्ध अस्पताल के साथ हुए MoU के अनुसार।

सामान्य रेफरल 30 दिन के लिए वैध है, और कैंसर के इलाज के लिए रेफरल 90 दिन के लिए। पैनलबद्ध अस्पतालों की सूची HMIS ऐप और रेलवे अस्पतालों में मिलती है। सूची बदलती रहती है, इसलिए FAQ के अनुसार स्थानीय CMS ऑफिस से सूची की वैधता पूछ लें।

इमरजेंसी में क्या करें

स्थिति

क्या करें (FAQ के अनुसार)

सबसे पास रेलवे अस्पताल है

सीधे वहाँ जाएँ, UMID दिखाएँ और इलाज कराएँ

पास में रेलवे अस्पताल नहीं, पर पैनलबद्ध अस्पताल है

सीधे वहाँ जाएँ, UMID दिखाएँ। पहचान UMID और OTP से जाँची जाती है, और इमरजेंसी की पुष्टि रेलवे अस्पताल से होने पर इलाज कैशलेस होगा। FAQ में यह सुविधा 24 घंटे, साल के 365 दिन बताई गई है

न रेलवे अस्पताल, न पैनलबद्ध अस्पताल पास में

गैर-पैनलबद्ध निजी अस्पताल में इलाज कराएँ, असली बिल, डिस्चार्ज समरी और जाँच रिपोर्ट सँभालकर रखें, और इलाज पूरा होने के 6 महीने के भीतर पंजीकृत CMS ऑफिस में दावा जमा करें

FAQ के अनुसार जान को खतरे वाली स्थितियों में (जैसे सीने में दर्द, स्ट्रोक, दुर्घटना, साँस फूलना, फ्रैक्चर, बेहोशी) रेलवे के रेफरल के बिना सीधे पैनलबद्ध अस्पताल जाया जा सकता है। पर निजी गैर-पैनलबद्ध अस्पताल में अपनी मर्जी से कराए गए नियोजित (elective) इलाज का खर्च वापस नहीं मिलेगा।

VR लेने वालों के लिए 12.02.2026 का आदेश

  • आदेश की शुरुआत में बोर्ड के 13.10.2003 के पत्र (संख्या 2003/H/JCM-DC) का जिक्र है। उसमें कहा गया था कि सेवा में रहते हुए जिन कर्मचारियों का निधन हो गया, उनके परिवार के सदस्यों को RELHS कार्ड बनने तक मानवीय नजरिए से इलाज दिया जाए।

  • नया आदेश कहता है कि यही मानवीय नजरिया उन कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए भी अपनाया जाए जो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले रहे हैं, RELHS कार्ड बनने तक। जरूरत हो तो सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेकर।

  • आदेश के विषय में “inhuman stoppage” यानी इलाज के अमानवीय ढंग से रुक जाने की बात है। यानी असली समस्या यह थी कि VR के बाद और RELHS कार्ड बनने से पहले के बीच इलाज रुक जाता था।

आदेश में क्या साफ नहीं है

  • “मानवीय नजरिया अपनाने की सलाह” (advised) लिखी है। यह इलाज का तय अधिकार नहीं, अस्पतालों को निर्देश है। आदेश में रेलवे के अस्पतालों के लिए कोई समय-सीमा या तय प्रक्रिया नहीं बताई गई।

  • “सक्षम प्राधिकारी” कौन है, और मंजूरी कैसे ली जाएगी, यह आदेश में नहीं है।

  • RELHS कार्ड बनने में कितना समय लगता है, यह न इस आदेश में है, न FAQ में।

  • FAQ में UMID को अपने आप बनने वाला बताया गया है, पर VR के मामले में कार्ड बनने की समय-सीमा क्या रहेगी, यह वहाँ नहीं लिखा।

नवजात शिशुओं के लिए 27.02.2026 का आदेश

रेलवे बोर्ड का पत्र संख्या 2025/H-1/19/1/DC(JCM), दिनांक 27.02.2026, डॉ. आशुतोष गर्ग (निदेशक/स्वास्थ्य, नीति और परियोजना) के डिजिटल हस्ताक्षर से, DGRHS की मंजूरी से जारी हुआ। यह सभी रेलवे के प्रिंसिपल चीफ मेडिकल डायरेक्टर और उत्पादन इकाइयों (RDSO सहित) के चीफ मेडिकल ऑफिसर को भेजा गया है।

  • हाल की DC/JCM बैठक में कर्मचारी पक्ष ने सवाल उठाया था कि रेलवे चिकित्सा लाभार्थियों के नवजात बच्चों को UMID कार्ड न होने पर चिकित्सा सुविधा कैसे मिले।

  • आदेश में बताया गया है कि HMIS में नवजात शिशुओं के लिए UMID कार्ड तुरंत बनाने की व्यवस्था उपलब्ध है।

  • साथ ही सभी संबंधित लोगों को निर्देश देने को कहा गया है कि वे मानवीय नजरिया अपनाएँ, ताकि रेलवे चिकित्सा लाभार्थियों के नवजात शिशुओं को इमरजेंसी में UMID कार्ड न होने की वजह से जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलने में देरी न हो।

इसमें क्या साफ नहीं है: आदेश यह नहीं बताता कि HMIS पर नवजात का UMID तुरंत बनवाने के लिए क्या करना होगा या कितना समय लगेगा। मानवीय नजरिया अपनाने की बात सिर्फ इमरजेंसी के लिए लिखी है; सामान्य (गैर-इमरजेंसी) इलाज के बारे में आदेश कुछ नहीं कहता। यह आदेश सभी रेलवे चिकित्सा लाभार्थियों के लिए है, सिर्फ रिटायर कर्मचारियों के लिए नहीं। नवजात का नाम UMID में जुड़वाने की प्रक्रिया अपने रेलवे अस्पताल या पर्सनल ब्रांच से पूछें।

परिवार के कौन-से सदस्य आश्रित गिने जाते हैं: रिकॉर्ड पर पुराने आदेश

FAQ कहता है कि पात्र आश्रित “मौजूदा नियमों” के अनुसार तय होंगे। हमारे पास IRMM-2000 के पैरा 601 से जुड़े ये पुराने आदेश हैं। इन्हें आज के नियम की तरह न पढ़ें, यह रिकॉर्ड पर मौजूद इतिहास है। आज की स्थिति की पुष्टि अपने CMS या पर्सनल ब्रांच से करें।

आदेश

क्या कहा गया

05.09.2000 (संख्या 2000/H/PNM-AIRF, S.No. 8 of Health 2000)

पैरा 601(5) और 601(6) में बदलाव। परिवार के सदस्य: पति/पत्नी; 21 साल से कम उम्र के बेटे (पूरी तरह निर्भर हों तो); अविवाहित बेटियाँ (कमाती हों या नहीं, उम्र की कोई सीमा नहीं); 18 साल से कम उम्र की विवाहित बेटियाँ और किसी भी उम्र की विधवा बेटियाँ (पूरी तरह निर्भर हों तो); सौतेले बच्चे और एक गोद लिया बच्चा (इन्हीं उम्र सीमाओं के भीतर)। आश्रित रिश्तेदार: विधवा हो तो माँ/सौतेली माँ; पिता जीवित न हों तो अविवाहित या विधवा बहनें/सौतेली बहनें और 21 साल से कम उम्र के भाई/सौतेले भाई। “पूरी तरह निर्भर” का मतलब: ऐसा व्यक्ति जिसकी अपनी आय कर्मचारी के वेतन-भत्तों के 15 प्रतिशत या ₹1,500 और उस पर महँगाई राहत, जो ज्यादा हो, उससे अधिक न हो। पति-पत्नी दोनों रेलवे कर्मचारी हों तो पत्नी अपनी या पति की, जो ज्यादा फायदेमंद हो, उस हैसियत से सुविधा ले सकती है

16.02.2009 (संख्या 2008/H-I/2/15, S.No. 1 Health 2009, शुद्धिपत्र)

सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों के आश्रित बच्चों के लिए चिकित्सा सुविधा में 25 साल की उम्र सीमा हटाई गई। पैरा 601(5)(b)(ii) अब इस तरह पढ़ा जाए: 21 साल से ऊपर के अविवाहित बेटे, बिना ऊपरी उम्र सीमा के, चाहे वे छात्र या अशक्त न हों, बशर्ते वे पूरी तरह निर्भर हों और रेलवे कर्मचारी के साथ रहते हों

18.06.2018 (बोर्ड का पत्र 2017/H-1/2/10/R.C.F., Advance Correction Slip S.No. 2 Health 2018)

पैरा 601(5) में नया पाठ: जब बेटा नौकरी में लग जाए या उसकी शादी हो जाए, तो रेलवे चिकित्सा सुविधा नहीं दी जाएगी, भले ही वह बाद में बेरोजगार हो जाए, तलाकशुदा हो या विधुर हो जाए

2018 का आदेश हमारे पास सिर्फ Advance Correction Slip के रूप में है; उस सुधार-पर्ची का आधार बना बोर्ड का मूल पत्र हमने नहीं देखा।

पुराना इतिहास: RELHS-97 को फिर खोलना (2009)

  • बोर्ड के 16.03.2009 के पत्र (संख्या 2003/H/28/1/RELHS) से RELHS-97 उन रिटायर कर्मचारियों के लिए “आखिरी और अंतिम मौके” के रूप में फिर खोली गई जो योग्य सेवा वाले होने के बावजूद अब तक इसमें नहीं जुड़े थे। यह मौका 31.03.2010 तक था।

  • उस समय जुड़ने वालों के लिए जुड़ने की तारीख (फीस जमा करने की तारीख) से 6 महीने का “लॉक-इन पीरियड” था। इस दौरान इलाज सिर्फ रेलवे और सरकारी अस्पतालों में था, निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च वापस नहीं मिलता था।

  • उसी पत्र के पैरा 5 में सभी रिटायर होने वाले रेलवे कर्मचारियों के लिए RELHS-97 में जुड़ना अनिवार्य करने की बात थी। जो जुड़ना न चाहे, उसे कारण सहित लिखित में बताना था, और यह अंतिम माना जाना था। 08.04.2009 के शुद्धिपत्र से यही पैरा दोबारा जारी किया गया, उसके शब्दों में हमें कोई फर्क नहीं दिखा।

  • उस पत्र में योगदान की दर भी लिखी थी (छठे वेतन आयोग के बाद संशोधित पेंशन का दोगुना, आदि)। ये 2009 की दरें हैं। आज की व्यवस्था FAQ के अनुसार अलग है।

  • 2026 के FAQ में लॉक-इन पीरियड का जिक्र नहीं है। यह हमें नहीं मालूम कि वह आज लागू है या नहीं।

क्या साफ नहीं है (सारांश)

  • FAQ एक सूचना-दस्तावेज़ है, आदेश नहीं। मतभेद की स्थिति में मौजूदा नियम ही चलेंगे। इसलिए अहम बातों की पुष्टि CMS ऑफिस या पर्सनल ब्रांच से करें।

  • VR वाले आदेश में समय-सीमा, मंजूरी की प्रक्रिया और कार्ड बनने में लगने वाला समय नहीं बताया गया।

  • नवजात वाले आदेश में UMID तुरंत बनवाने की प्रक्रिया और समय नहीं है, और राहत सिर्फ इमरजेंसी के लिए लिखी है।

  • परिवार के सदस्यों की सूची और “पूरी तरह निर्भर” की आय सीमा के बारे में हमारे पास 2000, 2009 और 2018 के आदेश हैं। इनके बाद कोई बदलाव हुआ हो तो हमें नहीं दिखा।

  • 2009 के लॉक-इन पीरियड और योगदान की दरें आज लागू हैं या नहीं, यह हमें मालूम नहीं है।

रिटायरमेंट से पहले की चेकलिस्ट (FAQ के अनुसार)

  1. RELHS ऑप्शन फॉर्म रिटायरमेंट से लगभग तीन महीने पहले जमा करें।

  2. देख लें कि RELHS की राशि रिटायरमेंट के भुगतान से कट रही है।

  3. सुनिश्चित करें कि आपका UMID बन गया है।

  4. पात्र आश्रितों को UMID में जुड़वाएँ।

  5. अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर जाँच लें।

  6. PPO, आधार और UMID की जानकारी सुरक्षित रखें।

  7. जरूरी कागजों की डिजिटल कॉपी रखें (FAQ में DigiLocker सुझाया गया है)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

RELHS क्या है?

रिटायर्ड एम्प्लॉयीज़ लिबरलाइज्ड हेल्थ स्कीम। यह सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों और उनके पात्र आश्रितों को चिकित्सा सुविधा देती है।

RELHS में कब जुड़ना चाहिए?

रिटायरमेंट से पहले। FAQ के अनुसार ऑप्शन फॉर्म पर्सनल ब्रांच में लगभग तीन महीने पहले जमा करना ठीक रहेगा।

FMA लेना ठीक है या नहीं?

FAQ में बिना FMA वाला विकल्प सुझाया गया है, खासकर उनके लिए जो रेलवे स्वास्थ्य सुविधा वाले शहर में रहते हैं। FMA (₹1,000 प्रति माह) के साथ रेलवे अस्पताल में सामान्य OPD नहीं मिलती। गाँव में बसने वालों के लिए, जहाँ 50 किमी के भीतर रेलवे स्वास्थ्य सुविधा नहीं है, FMA ठीक हो सकता है। अपनी स्थिति देखकर फैसला करें। विकल्प एक बार बदला जा सकता है।

RELHS में जुड़ने की फीस कितनी है?

FAQ के अनुसार एक बार की राशि: आखिरी बेसिक पे या 7वें वेतन आयोग के लेवल पर आधारित निश्चित राशि, जो कम हो। सटीक राशि अपनी पर्सनल ब्रांच से पूछें।

क्या सिर्फ अपने शहर के रेलवे अस्पताल में इलाज होगा?

नहीं। FAQ के अनुसार देश के किसी भी रेलवे अस्पताल या स्वास्थ्य इकाई में इलाज लिया जा सकता है।

क्या इलाज मुफ्त है?

FAQ के अनुसार रेलवे अस्पताल में भर्ती और इलाज मुफ्त है, और क्रॉनिक बीमारी की जरूरी दवाएँ भी मुफ्त हैं। अस्पताल का डाइट शुल्क लग सकता है।

निजी अस्पताल में इलाज कब कराया जा सकता है?

पैनलबद्ध निजी अस्पताल में रेलवे के रेफरल पर कैशलेस इलाज मिलता है, और इमरजेंसी में सीधे भी। निजी गैर-पैनलबद्ध अस्पताल में नियोजित इलाज का खर्च नहीं मिलता। गैर-पैनलबद्ध अस्पताल में इमरजेंसी इलाज का दावा 6 महीने के भीतर CMS ऑफिस में जमा करना होता है।

रेफरल कितने दिन चलता है?

सामान्य रेफरल 30 दिन, कैंसर के इलाज के लिए 90 दिन।

VR लेने के बाद RELHS कार्ड बनने तक इलाज कैसे मिलेगा?

12.02.2026 के आदेश के अनुसार VR लेने वाले कर्मचारियों और उनके परिवार को RELHS कार्ड बनने तक मानवीय नजरिए से इलाज देने की सलाह दी गई है, जरूरत हो तो सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेकर। समय-सीमा और प्रक्रिया आदेश में नहीं है, इसलिए अपने रेलवे अस्पताल में लिखित में पूछ लें।

नवजात बच्चे का UMID न बना हो तो इलाज कैसे मिलेगा?

27.02.2026 के आदेश के अनुसार HMIS में नवजात शिशुओं के लिए UMID तुरंत बनाने की व्यवस्था है, और इमरजेंसी में UMID न होने के कारण इलाज में देरी न हो, इसके लिए मानवीय नजरिया अपनाने के निर्देश हैं। इसके लिए जरूरी कदम आदेश में नहीं हैं, इसलिए अपने रेलवे अस्पताल से पूछें।

क्या 21 साल से बड़े बेटे को भी चिकित्सा सुविधा मिलती है?

2009 के शुद्धिपत्र के अनुसार हाँ, बिना ऊपरी उम्र सीमा के, अगर वह अविवाहित है, पूरी तरह निर्भर है और कर्मचारी के साथ रहता है। पर 2018 की Advance Correction Slip के अनुसार बेटे के नौकरी में लगने या शादी होने के बाद सुविधा नहीं मिलती, चाहे वह बाद में बेरोजगार, तलाकशुदा या विधुर हो जाए। आज के नियम की पुष्टि CMS से करें।

इस लेख के स्रोत: रेलवे बोर्ड का पत्र 2026/H-1/2/2/Medical Facilities, दिनांक 12.02.2026; रेलवे बोर्ड का पत्र 2025/H-1/19/1/DC(JCM), दिनांक 27.02.2026; रेलवे बोर्ड के स्वास्थ्य निदेशालय का FAQ “Healthcare Facilities for Retired Railway Employees” (ई-ऑफिस फाइल 2025/H-1/2/3/RELHS-Part(I), 30.09.2026 को तैयार); बोर्ड का पत्र 2000/H/PNM-AIRF दिनांक 05.09.2000 (S.No. 8 of Health 2000); शुद्धिपत्र 2008/H-I/2/15 दिनांक 16.02.2009 (S.No. 1 Health 2009); बोर्ड के पत्र 2003/H/28/1/RELHS दिनांक 16.03.2009 और शुद्धिपत्र दिनांक 08.04.2009; Advance Correction Slip S.No. 2 Health 2018 (बोर्ड के पत्र 2017/H-1/2/10/R.C.F. दिनांक 18.06.2018 के आधार पर)।

यह जानकारी रेलवे बोर्ड के आदेशों और स्वास्थ्य निदेशालय के FAQ पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। तालिकाएँ और सुझाव हमारे हैं, आदेश का हिस्सा नहीं। FAQ के अनुसार मतभेद की स्थिति में मौजूदा नियम और पॉलिसी गाइडलाइंस मान्य होंगी। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और लागू नियमों पर निर्भर है। अपने CMS ऑफिस या पर्सनल ब्रांच से पुष्टि जरूर करें।

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