
रेलवे कर्मचारियों के हजारों करोड़ के बकाये पर सवाल! भत्तों के भुगतान के लिए रेलवे क्या कदम उठाएगी।
- Date of Posting
- 9 October 2026
रेलवे कर्मचारियों के ₹52.5 करोड़ के OTA बकाये का मामला: AIRF ने ₹65 करोड़ के विशेष फंड की मांग उठाई
रेलवे में OTA, TA और Children Education Allowance (CEA) जैसे भत्तों का समय पर भुगतान कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। ड्यूटी के दौरान अतिरिक्त कार्य, यात्रा और बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्चों के बीच भुगतान में देरी कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव डाल सकती है। इसी संदर्भ में AIRF ने रेलवे बोर्ड के समक्ष लंबित भत्तों और अतिरिक्त फंड की आवश्यकता का मामला उठाया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कर्मचारियों के बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए रेलवे प्रशासन क्या कदम उठाता है।
रेलवे कर्मचारियों के लंबित ओवरटाइम अलाउंस (OTA) और अन्य बकाया भुगतान का मामला एक बार फिर रेलवे बोर्ड के सामने उठाया गया है। ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) के महासचिव कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को रेलवे बोर्ड के सदस्य (वित्त) को पत्र लिखकर कर्मचारियों के बकाये के भुगतान के लिए अतिरिक्त फंड जारी करने और आवश्यक निर्देश देने की मांग की है।
यह मामला पूर्ववर्ती ईस्ट कोस्ट रेलवे के वाल्टेयर डिवीजन के उन कर्मचारियों से संबंधित है, जो रेलवे जोन के पुनर्गठन के बाद अब साउथ कोस्ट रेलवे के रायगड़ा और विशाखापत्तनम डिवीजनों के अंतर्गत कार्यरत हैं।
₹52.5 करोड़ का OTA बकाया
AIRF के पत्र के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों का लंबित ओवरटाइम अलाउंस लगभग ₹52.5 करोड़ है। इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बकाया शामिल हैं:
कर्मचारी श्रेणी | अनुमानित बकाया |
|---|---|
रनिंग स्टाफ | ₹36 करोड़ |
ऑपरेटिंग स्टाफ/ट्रेन मैनेजर | ₹10 करोड़ |
कैरिज एंड वैगन (C&W) स्टाफ | ₹1.5 करोड़ |
इलेक्ट्रिकल/जनरल (AC मैकेनिक) एवं मैकेनिकल स्टाफ | ₹5 करोड़ |
कुल | ₹52.5 करोड़ |
पत्र में ऑपरेटिंग स्टाफ/ट्रेन मैनेजर, C&W तथा इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल स्टाफ के लिए जुलाई 2025 से जून 2026 की अवधि के बकाये का उल्लेख किया गया है। रनिंग स्टाफ के बकाये का विवरण भी AIRF ने रेलवे बोर्ड के समक्ष रखा है।
CEA और TA का भुगतान भी लंबित होने की शिकायत
AIRF ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि साउथ कोस्ट रेलवे में कर्मचारियों का Children Education Allowance (CEA) और Travelling Allowance (TA) भी पिछले तीन महीनों से लंबित बताया जा रहा है।
फेडरेशन के अनुसार, ओवरटाइम अलाउंस और अन्य वैध देयकों का लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से प्रभावित कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। AIRF ने इस मामले में पहले भी रेलवे बोर्ड और संबंधित रेलवे प्रशासन के समक्ष पत्राचार किए जाने का उल्लेख किया है।
रेलवे बोर्ड से ₹65 करोड़ के विशेष फंड की मांग
AIRF महासचिव ने रेलवे बोर्ड से अनुरोध किया है कि लंबित OTA और अन्य संबंधित देयकों के भुगतान के लिए लगभग ₹65 करोड़ का अतिरिक्त फंड/विशेष अनुदान स्वीकृत कर साउथ कोस्ट रेलवे को आवंटित किया जाए।
पत्र में संबंधित रेलवे प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है, ताकि पात्र कर्मचारियों के दावों का सत्यापन कर लंबित भुगतान जल्द पूरा किया जा सके।
कर्मचारियों के लिए क्या महत्वपूर्ण है?
इस मामले में दो बातें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। पहली, AIRF ने OTA के लगभग ₹52.5 करोड़ के बकाये का विवरण देते हुए अतिरिक्त फंड की मांग की है। दूसरी, CEA और TA के लंबित भुगतान का मुद्दा भी रेलवे बोर्ड के समक्ष उठाया गया है।
हालांकि, AIRF का पत्र फंड स्वीकृत होने या भुगतान जारी होने का आदेश नहीं है। फिलहाल यह रेलवे बोर्ड से की गई मांग है। भुगतान की वास्तविक स्थिति संबंधित प्रशासन की कार्रवाई और फंड की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
SarkariKaramchari.com की नजर इस मामले में रेलवे बोर्ड और साउथ कोस्ट रेलवे की आगे की कार्रवाई पर रहेगी।

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