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रेलवे कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: मेडिकल फिटनेस और सर्विस नियमों से जुड़ा रेलवे बोर्ड का नया आदेश, जानें पूरी बात

रेलवे कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: मेडिकल फिटनेस और सर्विस नियमों से जुड़ा रेलवे बोर्ड का नया आदेश, जानें पूरी बात

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Date of Posting
27 October 2026
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All states

अगर आप रेलवे में काम करते हैं और LASIK (आँखों का चश्मा हटाने वाली सर्जरी) कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। रेलवे बोर्ड ने 26 अक्टूबर 2026 को एक नया आदेश (RBE No. 88/2026) जारी किया है। इसमें साफ बताया गया है कि जो कर्मचारी रेलवे डॉक्टरों की सलाह के बिना अपनी मर्जी से LASIK कराते हैं और बाद में अपनी मेडिकल कैटेगरी में अनफिट हो जाते हैं, उनके साथ क्या होगा।

आदेश की मुख्य बातें, एक नजर में

बात

जानकारी

आदेश

RBE No. 88/2026, रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली

तारीख

26 अक्टूबर 2026

फाइल नंबर

E(NG)I-2024/RE-3/7-Part(1)

किसे भेजा गया

सभी जोनल रेलवे और प्रोडक्शन यूनिट के महाप्रबंधक (पर्सनल)

विषय

अपनी मर्जी से LASIK कराने के बाद अपनी मेडिकल कैटेगरी में अनफिट पाए गए रेल कर्मचारियों की रीडिप्लॉयमेंट (नई जगह तैनाती)

किस मामले में जारी

दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के 19.05.2026 और 25.08.2026 के पत्रों के जवाब में

किसने जारी किया

अजय गोयल, उप निदेशक-III (स्थापना-एन), रेलवे बोर्ड

रेलवे बोर्ड ने यह आदेश क्यों दिया?

आदेश के मुताबिक, ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जिनमें कर्मचारी रेलवे डॉक्टरों की सलाह के बिना खुद LASIK करा लेते हैं। बोर्ड का कहना है कि ऐसा शायद इसलिए किया जा रहा है ताकि बाद में अनफिट होने पर उसी वेतनमान (पे स्केल) में दूसरी नौकरी और सर्विस के लाभ मिल जाएं। रनिंग स्टाफ के मामले में पे फिक्सेशन में रनिंग भत्ते का हिस्सा गिनने का फायदा भी इसी से जुड़ा बताया गया है। बोर्ड ने कहा कि ऐसी गड़बड़ियों का सुरक्षा और ट्रेन संचालन पर गंभीर असर पड़ता है।

अब क्या नियम होगा?

  • जो कर्मचारी रेलवे डॉक्टरों की सलाह के बिना अपनी मर्जी से LASIK कराते हैं, उनके मामले IREM वॉल्यूम-I के पैरा 1311(1) के तहत देखे जाएँगे।

  • ऐसे कर्मचारियों को "अपनी रिक्वेस्ट पर ट्रांसफर हुए स्टाफ" की तरह माना जाएगा।

  • मेडिकल डिकैटेगराइजेशन (मेडिकल कारण से कैटेगरी बदलने) पर मिलने वाले लाभ, जैसे पैरा 1301, पैरा 1307 और पैरा 1308 के लाभ, ऐसे स्टाफ पर लागू नहीं होंगे।

  • इसके बजाय अपनी-मर्जी वाले ट्रांसफर के मौजूदा नियम लागू होंगे।

  • पुराने मामले: जिन मामलों में पहले ही दूसरा फैसला हो चुका है, उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा।

पहले और अब: क्या बदल गया?

बात

मेडिकल कारण से कैटेगरी बदलने पर (पहले)

बिना सलाह के खुद LASIK कराने पर (अब)

नौकरी

वैकल्पिक नौकरी, उसी वेतनमान में (पैरा 1301)

यह लाभ लागू नहीं

रनिंग स्टाफ का पे फिक्सेशन

रनिंग भत्ते का हिस्सा गिना जाता है (पैरा 1307)

यह लाभ लागू नहीं

पैरा 1308 के लाभ

मिलते थे

लागू नहीं

किस नियम से देखा जाएगा

मेडिकल डिकैटेगराइजेशन के नियम (IREM अध्याय XIII)

पैरा 1311(1) और अपनी-मर्जी वाले ट्रांसफर के नियम

इन नियमों का मतलब आसान भाषा में

पहले अगर किसी कर्मचारी की आँखों की वजह से मेडिकल कैटेगरी बदल जाती थी, तो रेलवे उसे दूसरी नौकरी देती थी और वेतन की सुरक्षा मिलती थी। अब अगर आपने रेलवे डॉक्टर की सलाह के बिना खुद LASIK कराया और उसके बाद आप अपनी कैटेगरी में अनफिट पाए गए, तो आपको वह सुरक्षा नहीं मिलेगी। आपको वैसे ही देखा जाएगा जैसे किसी ने खुद ट्रांसफर मांगा हो। आदेश में यह नहीं लिखा है कि वेतन पर इसका ठीक-ठीक क्या असर होगा, इसलिए अपने पर्सनल ब्रांच से पूछकर ही फैसला लें।

LASIK और रेलवे की मेडिकल फिटनेस: पहले से क्या नियम हैं?

  • रेलवे बोर्ड के 14 नवंबर 2023 के आदेश के अनुसार, LASIK कराने वाले कर्मचारियों के लिए मेडिकल कैटेगरी A1, A2 और A3 में अनफिट लिखा गया है। B1, B2, C1 और C2 में कुछ शर्तों के साथ फिट माना गया है।

  • शर्तों में जैसे ये बातें बताई गई हैं: सर्जरी में कोई परेशानी न हो, सर्जरी को कम से कम एक साल हो चुका हो, सर्जरी वाली जगह के विशेषज्ञ का प्रमाणपत्र हो, कॉर्निया की मोटाई (Residual Corneal Thickness) 425 माइक्रॉन से कम न हो, और नजर इंडियन रेलवे मेडिकल मैनुअल के पैरा 512 के मुताबिक हो।

  • यह नियम 2022 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद बना, जो आरपीएफ कांस्टेबल की भर्ती से जुड़ा था।

रेल कर्मचारी इन बातों का ध्यान रखें

  • LASIK कराने से पहले अपने रेलवे डॉक्टर या मेडिकल अथॉरिटी से सलाह लें, और सलाह लिखित में लें।

  • पहले अपनी मेडिकल कैटेगरी (A1 से C2 तक) पता करें, क्योंकि फिटनेस के नियम कैटेगरी के हिसाब से अलग हैं।

  • सर्जरी के कागज और विशेषज्ञ का प्रमाणपत्र संभालकर रखें।

  • सिर्फ व्हाट्सऐप की खबरों पर भरोसा न करें। आदेश का नंबर (RBE 88/2026) और तारीख अपने पर्सनल ब्रांच को दिखाकर पूछें।

  • यह चिकित्सा सलाह नहीं है। इलाज का फैसला हमेशा अपने डॉक्टर से पूछकर लें।

[यहाँ आपकी राय: आपके अनुसार इस आदेश का रेल कर्मचारियों पर क्या असर होगा? क्या यह फैसला सही है? 3 से 5 पंक्तियाँ अपने शब्दों में। इस पंक्ति को हटा दें।]

इस लेख में इस्तेमाल हुए स्रोत: रेलवे बोर्ड का आदेश RBE No. 88/2026 (26.10.2026); IREM वॉल्यूम-I, अध्याय XIII (पैरा 1301 से 1311); रेलवे बोर्ड का मास्टर सर्कुलर नंबर 25 (मेडिकल डिकैटेगराइज्ड स्टाफ का एब्जॉर्प्शन); LASIK पर रेलवे बोर्ड का आदेश दिनांक 14.11.2023।

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